माइक्रोन्यूट्रिएंट्स की कमी से शरीर पर क्या असर होता है?

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माइक्रोन्यूट्रिएंट्स की कमी से शरीर पर क्या असर होता है?

माइक्रोन्यूट्रिएंट्स की कमीआज के समय में हम खाने की मात्रा पर तो ध्यान देते हैं, लेकिन खाने की गुणवत्ता पर उतना नहीं। नतीजा यह होता है कि पेट तो भर जाता है, पर शरीर को जरूरी विटामिन और मिनरल नहीं मिल पाते।

इन्हीं जरूरी पोषक तत्वों को माइक्रोन्यूट्रिएंट्स कहा जाता है।  माइक्रोन्यूट्रिएंट्स बहुत कम मात्रा में चाहिए होते हैं, लेकिन इनकी कमी शरीर और दिमाग दोनों को गहराई से प्रभावित करती है।

थकान, बाल झड़ना, बार-बार बीमार पड़ना, चिड़चिड़ापन, डिप्रेशन, हॉर्मोनल गड़बड़ी, इन सबके पीछे कई बार माइक्रोन्यूट्रिएंट्स की कमी छुपी होती है। इस ब्लॉग में हम विस्तार से समझेंगे कि माइक्रोन्यूट्रिएंट्स क्या होते हैं, इनकी कमी क्यों होती है, शरीर पर इनके क्या-क्या असर पड़ते हैं और इन्हें पूरा करने के व्यावहारिक तरीके क्या हैं।

माइक्रोन्यूट्रिएंट्स क्या हैं?

माइक्रोन्यूट्रिएंट्स वे पोषक तत्व हैं जिनकी जरूरत शरीर को बहुत कम मात्रा में होती है, लेकिन इनके बिना शरीर की लगभग हर प्रक्रिया प्रभावित हो जाती है। मुख्य रूप से ये दो प्रकार के होते हैं:

1. विटामिन्स – जैसे विटामिन A, B कॉम्प्लेक्स, C, D, E, K
2. मिनरल्स – जैसे आयरन, कैल्शियम, मैग्नीशियम, जिंक, आयोडीन, पोटैशियम आदि

ये पोषक तत्व ऊर्जा बनाने, इम्यून सिस्टम मजबूत करने, हड्डियों को स्वस्थ रखने, दिमागी कार्य, रक्त निर्माण, त्वचा और बालों की सेहत तथा हॉर्मोन संतुलन के लिए जरूरी होते हैं। भारतीय आबादी में इनकी कमी आम है, जैसे विटामिन D की कमी 70-90% लोगों में पाई जाती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, ये तत्व एंजाइम्स, हार्मोन्स और सामान्य विकास के लिए जरूरी हैं।

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माइक्रोन्यूट्रिएंट्स की कमी क्यों होती है?

बहुत से लोग सोचते हैं कि सिर्फ गरीब या कुपोषित लोगों में ही कमी होती है, जबकि हकीकत यह है कि आज शहरी और पढ़े-लिखे लोग भी माइक्रोन्यूट्रिएंट डिफिशिएंसी का शिकार हैं। भारत में NFHS-5 सर्वे के मुताबिक, महिलाओं में आयरन की कमी से एनीमिया 57% तक है। गर्भावस्था, शाकाहारी भोजन या पुरानी बीमारियां भी कमी बढ़ाती हैं। इसके कारण हैं:

  • प्रोसेस्ड और पैकेज्ड फूड का ज्यादा सेवन
  • सब्ज़ी, फल और साबुत अनाज कम खाना
  • एक जैसा, सीमित डाइट पैटर्न
  • डाइजेशन और आंतों की समस्या
  • ज्यादा चाय-कॉफी
  • लंबे समय तक दवाइयों का सेवन
  • धूप में कम जाना
  • तनाव और नींद की कमी
  • पोषक तत्वों का अवशोषण न होना

विटामिन्स की कमी से शरीर पर प्रभाव

सभी विटामिन शरीर के अलग अलग अंगों को प्रभावित करते हैं –

1. विटामिन A की कमी

विटामिन A आंखों, त्वचा और इम्यून सिस्टम के लिए जरूरी है। इसकी कमी से: रात में साफ दिखाई न देना, आंखों में सूखापन, त्वचा रूखी और बेजान, बार-बार इन्फेक्शन

2. विटामिन B कॉम्प्लेक्स की कमी

B कॉम्प्लेक्स में कई विटामिन होते हैं, और इनकी कमी अक्सर एक साथ पाई जाती है। इसकी कमी से: अत्यधिक थकान और कमजोरी
मुंह के छाले, बाल झड़ना, चिड़चिड़ापन और घबराहट, याददाश्त कमजोर होना, हाथ-पैरों में झनझनाहट आदि होता है।

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3. विटामिन C की कमी

विटामिन C इम्यूनिटी और स्किन हेल्थ के लिए जरूरी है। इसकी कमी से: बार-बार सर्दी-जुकाम, मसूड़ों से खून आना, घाव देर से भरना, त्वचा पर दाग-धब्बे आदि होते हैं।

4. विटामिन D की कमी

यह आज की सबसे आम कमी है। इसके प्रभाव: हड्डियों और जोड़ों में दर्द, मांसपेशियों की कमजोरी, बार-बार थक जाना, मूड स्विंग और डिप्रेशन, इम्यून सिस्टम कमजोर होना आदि।

5. विटामिन E और K की कमी

विटामिन E की कमी से त्वचा और बालों की समस्या
विटामिन K की कमी से खून का सही तरह से थक्का न बनना

साइलेंट महामारी: लोगों में विटामिन D3 और B12 की कमी

मिनरल्स की कमी से शरीर पर प्रभाव

1. आयरन की कमी

आयरन की कमी से एनीमिया होता है, पुरुषों में 25%, महिलाओं में 57% इससे प्रभावित पाए गए हैं। आयरन की कमी खासतौर पर महिलाओं में बहुत आम है। इसके लक्षण: खून की कमी, सांस फूलना, चक्कर आना, हाथ-पैर ठंडे रहना, नाखून टूटना और चेहरे पर पीलापन आता है।

2. कैल्शियम की कमी

कैल्शियम सिर्फ हड्डियों के लिए ही नहीं, बल्कि मांसपेशियों और नर्व फंक्शन के लिए भी जरूरी है। कमी से: हड्डियां कमजोर होना, कमर और घुटनों में दर्द, दांत कमजोर होना, मांसपेशियों में ऐंठन जैसे लक्षण होते हैं।

3. मैग्नीशियम की कमी

इसकी कमी से होने वाले लक्षण निम्न हैं – नींद न आना, मांसपेशियों में खिंचाव, एंग्जायटी, दिल की धड़कन अनियमित होना आदि।

4. जिंक की कमी

ज़िंक की कमी से शरीर में कुछ लक्षण दिखते है – इम्यूनिटी कमजोर होना, बाल झड़ना, स्वाद और गंध पहचानने में कमी, घाव देर से भरना

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5. आयोडीन की कमी

आयोडीन की कमी से : थायरॉइड की समस्या, वजन बढ़ना या घटना, थकान और सुस्ती, बच्चों में मानसिक विकास पर असर होता है।

शरीर पर दीर्घकालिक असर

माइक्रोन्यूट्रिएंट्स की दीर्घकालिक कमी शरीर के हर अंग को गहराई से प्रभावित करती है, जिससे पुरानी बीमारियां विकसित हो सकती हैं।

इम्यून सिस्टम पर असर

लंबे समय तक जिंक, विटामिन A, C और D की कमी से प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर हो जाती है, जिससे बार-बार संक्रमण जैसे सर्दी-जुकाम, फेफड़ों के इंफेक्शन या कोविड जैसी बीमारियां होती रहती हैं। शरीर में सूजन बढ़ जाती है, जो जोड़ों, हृदय और आंतों को नुकसान पहुंचाती है, तथा घाव भरने में महीनों लग जाते हैं। WHO के अनुसार, वैश्विक स्तर पर इससे करोड़ों मौतें होती हैं, खासकर बच्चों और बुजुर्गों में।

हृदय और रक्त प्रणाली

आयरन और विटामिन B12 की लगातार कमी से एनीमिया क्रॉनिक हो जाता है, जो हृदय को कमजोर बनाकर हार्ट फेल्योर या हाई ब्लड प्रेशर का खतरा बढ़ाता है। मैग्नीशियम की कमी से अनियमित दिल की धड़कन और ब्लड वेसल्स सख्त हो जाते हैं, इससे डायबिटीज टाइप-2 का जोखिम दोगुना हो जाता है। भारतीय महिलाओं में 57% एनीमिया से हृदय रोग 30% तक बढ़ जाते हैं।

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हड्डियों और मांसपेशियों पर

विटामिन D, कैल्शियम की कमी से ऑस्टियोपोरोसिस होता है, हड्डियां भुरभुरी पड़कर फ्रैक्चर का खतरा 4 गुना बढ़ा देतीं है। मैग्नीशियम और पोटैशियम की कमी से मांसपेशियां कमजोर, उसमें ऐंठन और चलने-फिरने में दिक्कत बढ़ती है, खासकर 50 वर्ष बाद। बुजुर्गों में इससे बिस्तर पर लेटने की स्थिति बन जाती है।

तंत्रिका तंत्र और मस्तिष्क

विटामिन B12, और E की कमी से न्यूरोपैथी होती है- हाथ-पैरों में स्थायी जलन, सुन्नता और याददाश्त कमजोर होती है। दीर्घकालिक कमी से डिप्रेशन, चिंता और डिमेंशिया का खतरा 2-3 गुना बढ़ता है, मूड डिसऑर्डर आम हो जाते हैं। बच्चों में आयोडीन कमी से IQ 10-15 अंक कम रहता है, मानसिक विकास रुक जाता है।

प्रजनन और विकास पर

महिलाओं में आयरन तथा फोलिक एसिड की कमी से गर्भपात, समय से पहले प्रसव या कम वजन वाले बच्चे जन्म लेते हैं। पुरुषों में जिंक की कमी से स्पर्म क्वालिटी खराब होती है, बांझपन बढ़ता है। बच्चों में ग्रोथ स्टंटिंग स्थायी हो जाती है।

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कैंसर और अन्य पुरानी बीमारियां

विटामिन A, C, E की कमी से एंटीऑक्सीडेंट की क्षमता घटकर कोलन, फेफड़े कैंसर का खतरा बढ़ता है।
कुल मिलाकर, वैश्विक आबादी का आधा हिस्सा माइक्रोन्यूट्रिएंट्स की कमी से प्रभावित है, भारत में 70-90% लोग विटामिन D कमी से जूझ रहे हैं। यहाँ डायबिटीज-हार्ट रोग प्रमुख समस्या बन गयी है।

माइक्रोन्यूट्रिएंट्स की कमी और मानसिक स्वास्थ्य

बहुत कम लोग जानते हैं कि माइक्रोन्यूट्रिएंट्स की कमी का सीधा असर दिमाग पर भी पड़ता है। इसे होने वाली प्रमुख समस्याओं में- डिप्रेशन और एंग्जायटी, ध्यान केंद्रित करने में परेशानी, याददाश्त कमजोर होना, नींद की समस्या और चिड़चिड़ापन आदि हैं। कई बार लोग इसे सिर्फ मानसिक समस्या समझते हैं, जबकि जड़ में पोषण की कमी होती है।

महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों में विशेष जोखिम

महिलाएं: पीरियड्स, प्रेग्नेंसी और मेनोपॉज के कारण आयरन, कैल्शियम और विटामिन D की कमी
बच्चे: ग्रोथ, इम्यूनिटी और दिमागी विकास पर असर
बुजुर्ग: हड्डियां कमजोर, इम्यून सिस्टम धीमा, दवाइयों से अवशोषण कम

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बचाव के लिए आहार स्रोत

बचाव के लिए प्रमुख आहार स्रोत

माइक्रोन्यूट्रिएंटमुख्य भारतीय स्रोतदैनिक लाभ
विटामिन Dधूप (15 मिनट), दूध, मशरूम, अंडाहड्डियाँ मजबूत, इम्यूनिटी ↑
आयरनपालक, दालें, गुड़, रागी, चनाएनीमिया रोकथाम, ऊर्जा ↑
विटामिन B12दही, पनीर, दूध, अंडा (शाकाहारी: सप्लीमेंट)तंत्रिका स्वास्थ्य, थकान कम
विटामिन Cआंवला, नींबू, संतरा, टमाटर, शिमला मिर्चस्कर्वी रोक, इम्यूनिटी ↑
कैल्शियमदही, पनीर, रागी, बादाम, सागहड्डी मजबूती, मांसपेशी कार्य
जिंककद्दू के बीज, चना, नट्स, दालें, मछलीघाव भरना, बाल स्वस्थ
मैग्नीशियमबादाम, पालक, केला, दालें, साबुत अनाजमांसपेशी ऐंठन रोक, हृदय स्वास्थ्य
आयोडीननमक आयोडीन युक्त + समुद्री भोजनथायरॉइड नियंत्रण, मस्तिष्क विकास
💡 टिप: विटामिन C (नींबू) आयरन अवशोषण को 3 गुना बढ़ाता है। रोज़ थाली में 3 रंग वाली सब्जियाँ जोड़ें!

भोजन पकाने का सही तरीका

सब्जियों को ज्यादा उबालने, भुनने या तलने से बचें, सब्ज़ी काटकर देर तक न रखें, प्रेशर कुकिंग सीमित रखें, अल्मुनियम के बर्तन का इस्तेमाल ना करें। बदल बदल कर सब्जियां खाएं, बेहतर हो कि मौसमी सब्जियों का उपयोग करें।

जांच और उपचार

लक्षण जैसे थकान, बाल झड़ना, हड्डी दर्द दिखें तो ब्लड टेस्ट (सीबीसी, विटामिन प्रोफाइल) कराएं।
डॉक्टर सलाह पर सप्लीमेंट लें, जैसे विटामिन D इंजेक्शन या आयरन टैबलेट।
आहार सुधार से 80% कमी दूर हो सकती है, लेकिन ओवरडोज से बचें।

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जीवनशैली में बदलाव

  • रोज 15-20 मिनट धूप लें विटामिन D के लिए।
  • संतुलित भोजन, योग और ध्यान से अवशोषण बेहतर होता है।
  • 7-8 घंटे की पर्याप्त नींद लें।
  • शाकाहारियों को B12 सप्लीमेंट जरूरी। प्रोसेस्ड फूड कम करें।
  • नियमित शारीरिक गतिविधि करें।
  • नियमित चेकअप से कमी जल्दी पकड़ें, स्वस्थ रहें।
  • सप्लीमेंट डॉक्टर की सलाह से ही लें, क्योंकि जरूरत से ज्यादा मात्रा नुकसान भी कर सकती है।

निष्कर्ष

माइक्रोन्यूट्रिएंट्स भले ही मात्रा में छोटे हों, लेकिन इनके बिना शरीर का संतुलन बिगड़ जाता है। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में सिर्फ पेट भरना काफी नहीं, बल्कि शरीर को सही पोषण देना जरूरी है। अगर समय रहते माइक्रोन्यूट्रिएंट्स की कमी पर ध्यान दिया जाए, तो कई बड़ी बीमारियों से बचा जा सकता है और जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाया जा सकता है। याद रखें – स्वस्थ शरीर की नींव छोटे पोषक तत्वों से ही बनती है।

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