रोटी खाते समय ये गलती करते हैं लोग, तभी बढ़ता है पेट और वजन

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रोटी खाते समय ये गलती करते हैं लोग, तभी बढ़ता है पेट और वजन

भारत में रोटी हमारे रोज़मर्रा के खाने का अहम हिस्सा है। सुबह नाश्ता हो, दोपहर का भोजन या रात का खाना – रोटी लगभग हर घर में बनती है। लोग अक्सर सोचते हैं कि “रोटी तो हेल्दी है, इससे वजन क्यों बढ़ेगा?”

लेकिन सच्चाई यह है कि रोटी खुद समस्या नहीं है, बल्कि रोटी खाने का गलत तरीका समस्या बनता है। रोटी खाते समय की गई कुछ आम गलतियां धीरे-धीरे पेट की चर्बी, गैस, कब्ज, एसिडिटी और वजन बढ़ने का कारण बन जाती हैं। इस ब्लॉग में हम विस्तार से जानेंगे:

  • रोटी खाते समय लोग कौन-सी गलतियां करते हैं
  •  ये गलतियां पेट और वजन को कैसे बिगाड़ती हैं
  •  और रोटी खाने का सही तरीका क्या है

इन गलतियों को समझकर और सुधारकर आप न केवल पेट हल्का रख सकते हैं, बल्कि फिटनेस लक्ष्यों को भी आसानी से हासिल कर सकते हैं।

रोटी खाने सम्बन्धी रोजमर्रा की गलतियाँ

लोग अक्सर रोटी को मुख्य भोजन मान लेते हैं और बिना सोचे-समझे खाते रहते हैं। उदाहरण के लिए, एक सामान्य भारतीय थाली में 4-6 रोटियाँ होती हैं, लेकिन यह मात्रा हर व्यक्ति के लिए सही नहीं होती। यहाँ विस्तार से ऐसी गलतियों को इंगित किया जायेगा।

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1. जरूरत से ज्यादा रोटी खाना

सबसे आम और सबसे बड़ी गलती है – ज्यादा रोटी खाना। बहुत से लोग सोचते हैं: “सब्जी थोड़ी है, रोटी और ले लेते हैं” “रोटी तो हल्की होती है”। दिनभर में कितनी रोटियाँ खानी चाहिए? ज्यादातर लोग सुबह नाश्ते में 2, दोपहर में 3-4 और रात में 3 रोटियाँ खा लेते हैं, कुल 8-9 तक। यह मात्रा बहुत ज्यादा है।

एक वयस्क पुरुष को पुरे दिन में 4-6 और महिला को 3-5 रोटियाँ पर्याप्त हैं, बशर्ते बाकी थाली सब्जी, दाल और प्रोटीन से भरी हो और साथ में चावल ना हो, यदि चावल है तो रोटी की संख्या आधी करें। रात में भारी रोटी खाना सबसे बड़ी भूल है। रात 8 बजे के बाद पाचन क्षमता 30% कम हो जाती है, इसलिए रोटी जमा होकर फैट बनती है। इसके बजाय रात में 1-2 छोटी रोटियाँ या खिचड़ी चुनें।

सुबह रोटी खाने का समय अच्छा है, क्योंकि मेटाबॉलिज्म तेज होता है। लेकिन अगर आप जिम जाते हैं, तो सुबह प्रोटीन शेक या अंडे के साथ 1 रोटी लें। एक समय में 2–3 रोटी ज्यादातर लोगों के लिए पर्याप्त होती है। दोपहर का भोजन सबसे भारी हो सकता है, लेकिन रोटी को आधा हिस्सा रखें – बाकी दाल, सब्जी और सलाद।

लेकिन इससे क्या नुकसान होता है? ज्यादा रोटी खाने से शरीर में कार्बोहाइड्रेट की अधिकता हो जाती है, जो शरीर में चर्बी के रूप में जमा होने लगती है। इससे पेट बाहर निकलने लगता है और वजन धीरे-धीरे बढ़ता है। पाचन एंजाइम्स पर्याप्त न होने पर यह गैस, ब्लोटिंग और कब्ज पैदा करता है।

2. बहुत जल्दी-जल्दी रोटी खाना

आजकल लोग खाना खाते समय मोबाइल देखते हैं, टीवी देखते हैं या जल्दी में रहते हैं। ऐसे में रोटी ठीक से चबाए बिना निगल ली जाती है।इससे क्या होता है? इससे 20% ज्यादा कैलोरी चली जाती है। पाचन एंजाइम ठीक से काम नहीं कर पाते, पेट में गैस बनती है, खाना भारी लगता है, कब्ज और एसिडिटी की समस्या बढ़ती है।

पेट को यह समझने में लगभग 20 मिनट लगते हैं कि पेट भर गया है। अगर आप जल्दी खाते हैं, तो आप जरूरत से ज्यादा खा लेते हैं, तब आपको पता चलता है कि पेट भर गया। हर निवाले को 20–25 बार चबाएं, खाना खाते समय ध्यान सिर्फ खाने पर रखें। जल्दी निगलने से हवा पेट में चली जाती है, जिससे ब्लोटिंग होती है।

रोटी को गर्मागर्म ताजी खाना स्वादिष्ट लगता है, लेकिन यह जल्दी पचती है और दोबारा भूख लग जाती है। थोड़ी ठंडी या हल्की बासी रोटी बेहतर होती है – इसमें रेसिस्टेंट स्टार्च बनता है, जो कोलन बैक्टीरिया को फीड करता है और वजन घटाने में मदद करता है।

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3. रोटी के साथ गलत चीजें खाना

रोटी के साथ क्या न खाएं? ये जानना बेहद जरुरी है। रोटी के साथ कभी भी दूध, दही, ठंडा पानी, आलू, मिठाई या अचार नहीं खाना चाहिए, ये विरुद्ध आहार हैं। दूध के केसिन प्रोटीन रोटी के स्टार्च से जम जाते हैं, और गैस बनाते हैं। आलू की स्टार्च रोटी से मिलकर भारी होता है। बेहतर होगा- हरी सब्जी (पालक, भिंडी), दाल, मूंग स्प्राउट्स या चिकन (शाकाहारी न हों तो)। पिएं गर्म पानी या जीरा-अजवाइन का पानी।

रोटी अपने आप में बुरी नहीं होती, लेकिन जब उसके साथ ज्यादा तेल की सब्जी, मलाईदार दाल, पनीर या क्रीम वाली ग्रेवी जुड़ जाती है, तब पूरा भोजन कैलोरी बम बन जाता है। इससे – कैलोरी जरूरत से ज्यादा हो जाती है, फैट तेजी से जमा होता है, पेट और कमर पर चर्बी बढ़ती है। सब्जी में तेल नापकर डालें, रोज़ तली हुई सब्जी न खाएं, उबली, भुनी या कम तेल वाली सब्जी चुनें।

कुछ लोगों की आदत होती है: रोटी के साथ गुड़, रोटी के बाद मिठाई, खाने के तुरंत बाद कुछ मीठा। यह आदत बेहद गलत और नुकसानदेह है। रोटी में पहले से कार्बोहाइड्रेट होता है, मीठा मिलते ही ब्लड शुगर तेजी से बढ़ता है, शरीर फैट स्टोर करने लगता है।परिणाम होता है – पेट की चर्बी, वजन बढ़ना, डायबिटीज का खतरा।

रोटी को बिना किसी हेल्दी साथी के खाया जाता है तो वो नुकसान करती है। सिर्फ रोटी और अचार या आलू की सब्जी लेना पोषण असंतुलन पैदा करता है। फाइबर की कमी से आंतें सुस्त पड़ जाती हैं, और वजन घटाने की सारी कोशिशें बेकार चली जाती हैं।

4. आटे का गलत चुनाव

सफेद गेहूं का महीन आटा या मैदा रिफाइंड होता है, जिसमें ब्रान (छिलका) हटा दिया जाता है। इससे फाइबर, विटामिन B और मिनरल्स कम हो जाते हैं। ऐसी रोटी खाने से ब्लड शुगर तेजी से बढ़ता है (हाई ग्लाइसेमिक इंडेक्स), जो इंसुलिन स्पाइक पैदा करता है और फैट स्टोरेज बढ़ाता है। जिससे पेट जल्दी निकलता है।

बेहतर विकल्प है: गेहूं में 30% ज्वार, बाजरा, जौ, रागी या बेसन मिलाएं। मल्टीग्रेन आटा पाचन सुधारता है और भूख लंबे समय तक कंट्रोल रखता है। पिसा हुआ मेथी दाना या ओट्स मिलाने से रोटी का स्वाद भी अच्छा रहता है और पेट की गैस रुक जाती है। बाजार के रेडीमेड आटे से बचें, उसमें अनेक केमिकल मिले होते हैं, घर पर ताजा आटा बनाएं।

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5. पानी या कोल्ड ड्रिंक के साथ रोटी खाना

खाना खाते समय बहुत ज्यादा पानी या ठंडी चीजें पीना भी एक बड़ी गलती है। क्यों? पाचन रस पतले हो जाते हैं, जिससे खाना ठीक से नहीं पचता, गैस और अपच बढ़ती है। सही तरीका होता है- खाने से 30 मिनट पहले पानी, खाने के 45-60 मिनट बाद पानी, और खाते समय सिर्फ 2–3 घूंट पानी लेना चाहिए।

6. पकाने में होने वाली गलतियां

रोटी बनाते समय अगर तवा बहुत गर्म हो या ज्यादा देर तक रोटी सेंकें, तो सतह पर काले-भूरे धब्बे पड़ जाते हैं, इससे एक्रिलामाइड बनता है, जो कैंसर का खतरा बढ़ा सकता है। रोटी के आटे में स्टार्च (कार्बोहाइड्रेट) भरपूर होता है। जब तापमान 120-180°C तक जाता है तो
प्रोटीन का हिस्सा + शुगर मिलकर एक्रिलामाइड बना देते हैं। जितना गहरा रंग (भूरा/काला), उतना ज्यादा एक्रिलामाइड।

WHO और FSA ने इसके लिए “Go for Gold” कैंपेन चलाया जिसमें बताया गया की रोटी को सुनहरा भूरा तक पकाएं, काला न करें। बच्चों में इससे ज्यादा संवेदनशीलता होती है। एक औसत रोटी में बहुत कम (5-10 माइक्रोग्राम) होता है, लेकिन रोज 4-5 जली हुई रोटियां + चिप्स/बिस्किट से कुल एक्रिलामाइड बढ़ता है।

रोटी में काले धब्बे दिखें तो काटकर फेंक दें। ओवन/माइक्रो में कम तापमान (180°C से नीचे)। मल्टीग्रेन आटा चुनें – फाइबर एक्रिलामाइड कम करता है । तवे पर ज्यादा तेल या घी लगाना कैलोरी दोगुनी कर देता है। एक चम्मच घी में 120 कैलोरी! सूखी रोटी बनाएं या ब्रश से हल्का तेल लगाएं।

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7. रोटियों को एल्युमिनियम फॉयल में लपेटना

रोटियों को गर्म रखने के लिए एल्युमिनियम फॉयल में लपेटना सही आदत नहीं है, कभी-कभार और सही तरीके से किया जाए तो ठीक है। जब बहुत गर्म रोटी को सीधे एल्युमिनियम फॉयल में लपेटा जाता है, तो थोड़ी मात्रा में एल्यूमिनियम रोटी की सतह पर आ सकता है
यह मात्रा कम होती है, लेकिन रोज़-रोज़ हो तो समस्या बन सकती है। सबसे बड़ी गलती कब होती है? जब: रोटी बहुत गर्म हो, उस पर घी/नमक लगा हो और उसे सीधे फॉयल में कसकर लपेट दिया जाए।

फॉयल इस्तेमाल करना हो तो सुरक्षित तरीका ये है – रोटी को 2–3 मिनट ठंडा होने दें, फिर लपेटें, रोटी और फॉयल के बीच कॉटन कपड़ा या बटर पेपर रखें, रोज़ नहीं, कभी-कभार ही उपयोग करें। सबसे अच्छा विकल्प है कि साफ सूती कपड़े में रोटी लपेटें, फिर उसे हॉट पॉट या डिब्बे में रखें, अंदर कपड़ा बिछा दें, रोटी लंबे समय तक गर्म और सुरक्षित रहती है।

स्वास्थ्य पर असर

ये गलतियाँ पेट में एसिडिटी, IBS (इर्रिटेबल बाउल सिंड्रोम), कब्ज और फैटी लिवर पैदा करती हैं। वजन पेट के आसपास जमा होता है (विसरल फैट), जो डायबिटीज, हाई BP और हार्ट अटैक का कारण बनता है। महिलाओं में PCOS बढ़ता है, पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन कम होता है। लंबे समय में इससे थायरॉइड भी प्रभावित होता है।

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सही आदतें अपनाएं

  • सुबह: 1 रोटी + उबला अंडा/पनीर + हरी चटनी।
  • दोपहर: 2 रोटी + दाल + 2 कटोरी सब्जी + सलाद।
  • रात: 1-2 रोटी-सब्जी या दही-रोटी + सूप।
  • कुल कैलोरी: 6 इंच रोटी=70-80 कैलोरी।
  • रोज 10,000 स्टेप्स चलें।
  • पानी 3-4 लीटर पिएं।

अनेक स्टडीज दिखाती हैं कि संतुलित थाली से 5 किलो वजन 3 महीने में कम होता है। इंसुलिन रेसिस्टेंस रुकता है, और मेटाबॉलिज्म 15% तेज होता है।

निष्कर्ष

रोटी हमारी दुश्मन नहीं है। गलत आदतें रोटी को नुकसानदायक बना देती हैं। अगर आप सही मात्रा में, सही समय पर, सही तरीके से रोटी खाते हैं, तो न पेट बिगड़ेगा और न वजन बढ़ेगा। छोटे-छोटे सुधार अपनाकर आप पेट की चर्बी कम कर सकते हैं, पाचन सुधार सकते हैं और खुद को हल्का और फिट महसूस कर सकते हैं।

इन गलतियों से बचें तो रोटी आपका दोस्त बनेगी। धीरे-धीरे बदलाव लाएं – पहले मात्रा कम करें, फिर आटा सुधारें। 1 महीने में फर्क दिखेगा। इस लेख को अपने मित्रों और परिचितों तक पहुचायें, अपना फीडबैक हमें बताएं।

https://food.ndtv.com/food-drinks/7-roti-mistakes-you-did-not-even-realise-you-were-making-7701993

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